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महिला सषक्तीकरण 
समाज में महिलायों की प्रस्थिति एव ंउनके अधिकारों में वृद्धि ही महिला सषक्तीकरण है। महिला जिसे कभी मात्र 
भोग एर्व संतान उत्पत्ति की जरिया समझा जाता था,आज वह पुरूशो के साथ हर क्षेत्र में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।
जमीन से आसमान तक कोई क्षेत्र अछूता नही है,जहाँ महिलायों ने अपनी जीत का परचम न लहराया हो। हालांकि यहाँ तक का सफर तय करने के लिए महिलाओ को काफी मुष्किलों एवं सधर्श के दौर से गुजरना पड़ा है। 
औरत और नारी के बीच की कषमकष से संघर्श करती आज की स्त्री में छटपटाहत है आगे बढने की,जीवन एवं समाज के
प्रत्येक क्षेत्र में कुछ कर गुजरने की अपने अविराम अथक परिश्रम से पूरी दुनिया में एक नया सवेरा लाने की और एक 
ऐसी सषक्त इबारत लिखने की,बल्कि पूरे विष्व में मुख्यतःव्याप्त पुरूश प्रधान समाज ने एक समाज से लेकर आधुनिक समाज तक आधी दुनिया के प्रात ऐसा भेदभावपुर्ण नजरिया रखा गया,जिसने कभी भी स्त्रियों को एक व्यक्ति के रूप में
स्वीकार नही किया । उसे या तो देवी बनाया गया या फिर भेाग्य वस्तु । उसके व्यक्तित्व को उभरने का अवसर तो प्रदान ही नही किया गया। 
प्रसिद्व कवि जयषंकर प्रसाद ने लिखा है:-
‘‘ नारी तुम केवल श्रद्वा हो,विष्वास रजत नग पग तल में, 
यूँ पीयूश सा्रेत-सी बहा करो,जीवन के सुन्दर समतल में। 
आज की स्त्री न केवल पुरूशों के साथ कन्धे -से कंन्धा मिलाकर चलना चाहती है,बल्कि वह जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में बहुत आगे तक जाना चाहती है, जहाँ उसके उन्मुक्तता,सृजन एवं सबलता का अहसास हो, जहाँ उसकी प्रतिभा की पहचान हो और जहाँ उसके व्यक्तिगत का निर्माण हो। कुछ लोग वि़़द्यामान तथ्यों को देखकर कहते है, क्यो ? जबकि वह उन तथ्यों का स्वप्न देखती है,जो अस्तित्व में नही ह्रै और कहती है क्यो नही आज की स्त्री उन्मुक्त उडान भरने के लिए व्याकुल है,
नई सीमा को परिभाशित करने के लिए सचेत है और अपनी क्षमताओं का पूर्ण प्रदर्षन करने के लिए क्रृतसंकल्प । उसके 
मार्ग में आने वाली बाधाएँ अब उसकी दृढ इच्छा षक्ति के आगे टिक नही पाती।
उसने स्वयं को सीमित ही सही,लेकिन उस मुकाम पर स्थापित कर दिया है,जहाँ पुरूश प्रधान मानसिकता या समाज उसके व्यक्तित्व को नकार नही सकता, इसके बावजूद उसे अभी मीलों लम्बा सफर तय करना है,जो कटकपूर्ण एवं दुर्गम है,
लेकिन वह मानती है कि:–
‘‘ वह पथ क्या, पथिक कुषलता क्या ?
जिसमे बिखरे षूल न हों,
नविक की धैर्य-परीक्षा क्या ?
यदि धाराएँ प्रतिकूल न हो।‘‘ 
विविद फाउडेषन के द्वारा काफी महिलायों को आगे बढ़ाने के लिए काफी अथक प्रयास कर रहे है, आप को जानकार अधिक खुषी होगी कि हम महिलायो को स्वरोजगार बनाने के लिए अधिक प्रयास कर रहे है,महिलायो को भी अपना 
जीवन जीने का पूरा अघिकार है,